बिना ऑपरेशन किये भी आहार नली में हुए कैंसर को कर सकते हैं ठीक, जानें कुछ घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे

आहार नली में कैंसर

गलत रहन सहन और खान पान हमारे शरीर को हर दिन गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल रहा है। इससे हमारी किडनी, लीवर और हार्ट को नुकसान पहुँच रहा है। साथ ही लोगों में शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं। लेकिन इनमें सबसे गंभीर बीमारी अगर कोई होती है तो वो है कैंसर। कैंसर कई प्रकार के होते हैं, जो शरीर के हर भाग में उत्पन्न हो सकता है। हम आज आहार नली या खाने की नली में होने वाले कैंसर के बारे में आपको जानकारी देंगे। इस कैंसर को एसोफैगल कैंसर (Esophageal cancer) कहा जाता है।

कैंसर इतनी खतरनाक बीमारी है जिसका नाम सुनते ही व्यक्ति सहम जाता है। आज के समय में कैंसर के मामले में तेजी से इजाफा हो रहा है। हर साल करोड़ों लोग कैंसर जैसी घातक बीमारी के कारण अपनी जाएं गवां देते हैं क्योंकि इसके इलाज में काफी पैसा लगता है। ऐसे में इलाज के अभाव में व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ जाती है। लेकिन आप शायद ये बात नहीं जानते होंगे कि आप घर बैठे साधारण आयुर्वेदिक नुस्खे अपनाकर भी कैंसर को मात दे सकते हैं। खासबात ये है कि आयुर्वेदिक इलाज के जरिए आप बिना किसी सर्जरी के कैंसर को हरा सकते हैं। इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एसोफैगल कैंसर क्या होता है, एसोफैगल कैंसर कैसे और क्यों होता है, एसोफैगल कैंसर के लक्षण क्या है, एसोफैगल कैंसर से बचाव के तरीके और साथ ही एसोफैगल कैंसर के आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बताएंगे।

एसोफैगल कैंसर/आहार नली में कैंसर क्या होता है?

आहार नली एक ट्यूब की तरह होती है जो हमारे मुंह से होकर पेट तक जाती है। ये नली ही भोजन और सभी तरल पदार्थ को मुंह से पेट तक पहुंचाती है। एसोफैगल कैंसर अन्नप्रणाली यानी कि आहार नली में होता है। एसोफैगल कैंसर में खाने की नली यानी ग्रासनली में धीरे-धीरे कोशिकाएं विकसित होने लगती हैं और ये ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है, यह ग्रासनली के अधिक गहरे ऊतकों और मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है। अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया गया, तो पीड़ित मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और मौत का कारण बन सकता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ये कैंसर अधिक देखने को मिलता है।

आहार नली में कैंसर होने के क्या कारण हैं?

आहार नली में कैंसर भारत में छठा सबसे आम कैंसर है और भारत में कैंसर से होने वाली मौतों का छठा सबसे आम कारण है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे देश में हर साल लगभग 60,000 लोग इससे पीड़ित होते हैं। आहार नली में कैंसर होने का कोई एक कारण नहीं है। हम आपको आज इसके विभिन्न कारणों के बारे में बता रहे हैं।

शराब का सेवन

जो लोग ज्यादा शराब का सेवन करते हैं उन्हें इस कैंसर के होने का खतरा अधिक रहता है। वाइन या बीयर की तुलना में कड़वी शराब पीना शरीर के लिए ज्यादा हानिकारक होता है। एक रिसर्च के मुताबिक, जो लोग शराब का सेवन करते हैं उनमें आम लोगों की तुलना में अलग मेटाबोलिज्म होते हैं जो कैंसर का कारण बनते हैं।

उम्र भी है एक कारण

50 वर्ष या उससे अधिक वाले उम्र के लोगों को आहार नली में कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इस कैंसर के लक्षण दिखते ही सावधान हो जाना चाहिए, ना कि उन्हें नजरअंदाज करना चाहिए।

तम्बाकू का सेवन

तम्बाकू का किसी भी रूप में सेवन करने से आहार नली में कैंसर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। आप रोजाना जितनी तम्बाकू खाते हैं या धूम्रपान करते हैं, आहार नली में कैंसर होने का खतरा उतना ही बढ़ जाता है।

प्रजाति का फैक्टर

स्क्‍वामस सेल आहार नली कैंसर सफेद लोगों की तुलना में आमतौर पर अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों में तीन गुना अधिक देखा जाता है।

जेनेटिक

कुछ जेनेटिक म्यूटेशन्स और वंशानुगत स्थितियों के कारण नाक के कैंसर का होने की संभावना बढ़ सकती है।

आहार नली में कैंसर से बचने के क्या उपाय हैं?

  • स्मोकिंग छोड़ दें।
  • शराब के सेवन से बचें।
  • अधिक फल और सब्जियां खाएं।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें।
  • नियमित योग और एक्सरसाइज करते रहें।
  • हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।
  • खाने में पर्याप्त मात्रा में फाइबर डाइट को शामिल करें।

आहार नली में कैंसर होने के लक्षण क्या हैं?

  • खाने में परेशानी
  • अनियमित रूप से वजन में कमी आना
  • उल्टी होना।
  • खाने को निगलने में परेशानी होना।
  • सीने में जलन (heartburn)
  • सीने में दर्द होना
  • निगलने में परेशानी
  • एसिडिटी की शिकायत होना
  • खट्टी डकार आना
  • गले के आसपास दर्द होना।
  • पेट में अचानक तेज दर्द होना।
  • पुरानी खांसी दोबारा उठना
  • थकान महसूस होना
  • अत्यधिक हिचकी आना

आहार नली में कैंसर का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

आयुर्वेद में हर बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज बताया गया है। इसी तरह कैंसर जैसी घातक बीमारी का भी इलाज आयुर्वेद के पास मौजूद है। एसोफैगल कैंसर यानी आहार नली में कैंसर के लिए आयुर्वेद सबसे प्रभावी और उचित उपचार है। भले ही आयुर्वेदिक चिकित्सा को असर करने में समय लगता है लेकिन यह लंबे समय तक प्रभावी रहती है। साथ ही इससे शरीर में कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होते हैं। एलोपेथी में सर्जिकल ट्रीटमेंट, रेडिएशन और कीमोथेरेपी, इन तीन तकनीकों से इलाज किया जाता है। कैंसर किस प्रकार का है, कौनसे स्थान पर है, इस आधार में इसके इलाज की तकनीकी अलग-अलग होती हैं। आहार नली में कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। लेकिन आयुर्वेदिक इलाज में आपको सिर्फ आपके घर में मौजूद कुछ चीजों का सेवन करना होता है।

हल्दी और तुलसी

हल्दी और तुलसी दोनों में ही कई चमत्कारी गुण होते हैं। आप शायद ही ये बात जानते होंगे कि इसमें कैंसर रोकने वाले महत्वपूर्ण एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व भी पाए जाते हैं। डॉक्टर्स का भी दावा है कि तुलसी और हल्दी में मौजूद करक्यूमिन कैंसर को रोकने में मदद करते हैं।

अंगूर के बीज

काले अंगूर के बीज में कई ऐसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट ऐसे फ्री रेडिकल्‍स को खत्म करने में मदद करते हैं, जो मुंह में मौजूद सेल्स को नुक्सान पहुंचाते हैं।

सहजन के पत्ते

सहजन के पत्तों में केम्पफेरोल और आइसो-क्वरसेटिन नामक घटक पाए जाते हैं, जो कैंसर सेल के विकास को रोकने में मदद करते हैंI विभिन्न कैंसर कोशिका लाइनों पर सहजन का अर्क प्रभावी रूप से कार्य करता है तथा यह सभी प्रकार के कैंसर कोशिकाओ को मारता है।

अदरक

अदरक को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। इसमें कैंसर रोधी गुण होते हैं। कैंसर में होने वाली सूजन और दर्द से राहत दिलाने में अदरक का अर्क सबसे असरदार माना जाता है। साथ ही अदरक मतली और बेचैनी को भी कम कर देती है। आप इसमें सब्जी में डालकर या फिर कच्चा खा सकते हैं।

अश्वगंधा

अश्वगंधा सबसे बेहतर आयुर्वेदिक जड़ीबूटी मानी जाती है। इसमें सूजन को तुरंत कम करने की शक्ति होती है। साथ ही अश्वगंधा का सेवन करने से कई बड़ी बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। कैंसर रोगियों को अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए। ये कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद करती है।

लहसुन

कैंसर को रोकने में लहसुन भी काफी मददगार साबित हो सकता है। इसकी तासीर गर्म होती है इसीलिए लहसुन का सेवन शरीर में गर्माहट पैदा करता है, जो कैंसर सेल्स से लड़ने में मदद करता है। लहसुन का अर्क सुपरऑक्साइड के स्राव को रोककर एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है।

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